बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए सरकार ने विशेष योजना बनाई है। इसके तहत स्कूल की लाइब्रेरी से वर्ष में कम से कम 15 पुस्तकें अनिवार्य रूप से पढ़नी होंगी, जो सामान्य पढ़ाई के अतिरिक्त होगा। स्कूल शिक्षा निदेशालय की ओर से जिला शिक्षा अधिकारियों को भेजे परिपत्र में स्कूलों की लाइब्रेरियों को चाक-चौबंद बनाने के निर्देश दिए गए हैं। संयुक्त निदेशक (बाल शिक्षा) की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रदेश सरकार बच्चों के सर्वागीण विकास के प्रति गंभीर है। सामान्य पढ़ाई के अलावा बच्चों को अन्य चीजों का ज्ञान कराने के लिए स्कूलों में विशेष रूप से लाइब्रेरी की व्यवस्था की गई है, लेकिन ज्यादातर लाइब्रेरी में पुस्तकों का रखरखाव सही नहीं है। निदेशालय के अनुसार स्कूलों में स्थापित ज्यादातर लाइब्रेरी इसलिए बेहतरीन ढंग से संचालित नहीं हैं, क्योंकि हेड टीचर और शिक्षक अपनी जिम्मेदारी नहीं समझ रहे हैं। इसलिए जिला शिक्षा अधिकारियों को चाहिए
कि वह प्रत्येक स्कूल में हेड टीचर को निर्देश जारी करें कि वह लाइब्रेरी के संचालन की जिम्मेदारी के लिए शिक्षक की व्यवस्था करें। इसके अलावा प्रत्येक स्कूल के हेड टीचर की जिम्मेदारी है कि वह हर शुक्रवार को किताबों का चयन कर उसे शिक्षकों को प्रदान करे ताकि उनके बारे में बच्चों को बताया जा सके और बच्चे उन किताबों को लाइब्रेरी से जारी कराकर पढ़ सकें। प्रत्येक मंगलवार, बुधवार और बृहस्पतिवार को बच्चे लाइब्रेरी से जारी कराई गई पुस्तकों को पढ़ने के बाद उनके बारे में कक्षा में सुनाएंगे व साथियों के बीच चर्चा करेंगे। बृहस्पतिवार को ये किताबें वापस करनी होंगी। शुक्रवार को फिर नए सिरे से किताबें जारी कराई जा सकेंगी।
SOURCE:DAINIK JAGRAN
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